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कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ के पà¥à¤°à¤•ार (types of malnutrition)
कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ का कारण सिरà¥à¤« पोषक ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी होना ही नहीं बलà¥à¤•ि अधिक मातà¥à¤°à¤¾ में लेना à¤à¥€ हो सकता हैं. कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ निमà¥à¤¨ पà¥à¤°à¤•ार के हो सकते हैं:
तीवà¥à¤° कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ (à¤à¤•à¥à¤¯à¥‚ट मालनà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¤¿à¤¶à¤¨) –
जब वजन में बहà¥à¤¤ जà¥à¤¯à¤¾à¤¦à¤¾ कमी आती हैं, तब ये कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ होता हैं. इसके कारण 3 पà¥à¤°à¤•ार के कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ संà¤à¤µ है
1.मरसेमस-
इस बीमारी में शरीर में वसा तेजी से कम होने लगती हैं,और ऊतक(टिशà¥à¤¯à¥‚)à¤à¤¯à¤‚कर ख़राब होने लगते हैं. इसके कारण शरीर का पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तनà¥à¤¤à¥à¤° कमजोर होने लगता हैं.
2. कà¥à¤µà¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤°à¤•ोर –
इस बीमारी में बॉडी फà¥à¤²à¥‚इड शरीर से बाहर नहीं निकल पाता हैं, जिस कारण सà¥à¤•िन और बालों के रंग में परिवरà¥à¤¤à¤¨ आने लगता हैं, मोटापा, डायरिया, मसल मॉस का कम होना,रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तनà¥à¤¤à¥à¤° का कमजोर होना, वजन बढ़ना और विकास अवरà¥à¤¦à¥à¤§ होना, घà¥à¤Ÿà¤¨à¥‹à¤‚, पैरो और शरीर के निचले हिसà¥à¤¸à¥‡ में सà¥à¤œà¤¨à¤¹à¥‹à¤¨à¤¾ à¤à¥€ इसके लकà¥à¤·à¥à¤£ है,
3. मरà¥à¤¸à¥‡à¤®à¤¿à¤• कà¥à¤µà¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤•ोर–
यह मरसेमस और कà¥à¤µà¤¾à¤¶à¤¿à¤¯à¥‹à¤•ोर का मिशà¥à¤°à¤¿à¤¤ रूप हैं जिसमे दोनों रोगों के लकà¥à¤·à¥à¤£ दिखाई देते है.
कà¥à¤°à¥‹à¤¨à¤¿à¤• कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£â€“
ये बिमारी उन लोगो में पाई जाती हैं जो लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ से पीड़ित होते है,इसके परिणाम à¤à¥€ काफी लमà¥à¤¬à¥‡ समय तक परिलकà¥à¤·à¤¿à¤¤ होते हैं.यदि गरà¥à¤à¤µà¤¤à¥€ महिला को पूरा पोषण नहीं मिलता, तो यह होने वाले बचà¥à¤šà¥‡ में जनà¥à¤® के पहले ही शà¥à¤°à¥‚ हो जाता हैं,जिसका मतलब यह होता हैं की बचà¥à¤šà¤¾ जनà¥à¤® के समय से ही कमजोर होता हैं.इसके अलावा यदि नवजात को माठका दूध ना मिले तो à¤à¥€ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ की समà¥à¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ बनी रहती हैं.
विकास अवरà¥à¤¦à¥à¤§ कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£ (गà¥à¤°à¥‹à¤¥ फैलियर मालनà¥à¤¯à¥‚टà¥à¤°à¥€à¤¶à¤¨)–
इसमें रोगी का वजन और लमà¥à¤¬à¤¾à¤ˆ उमà¥à¤° की आवशà¥à¤¯à¤•ता अनà¥à¤¸à¤¾à¤° बढ़ नहीं पाते हैं.
सूकà¥à¤·à¥à¤® पोषक कà¥à¤ªà¥‹à¤·à¤£:-
रोगी के शरीर में जब विटामिन A,B,C और D,फोलेट,आयरन,आयोडीन,जिंक और कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® जैसे खनिज ततà¥à¤µà¥‹à¤‚ की कमी हो जाती है. ये सà¤à¥€ विटामिनà¥à¤¸ और खनिज शरीर के लिठबहà¥à¤¤ आवशà¥à¤¯à¤• हैं.
आयरन की कमी से à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ हो जाता है, दिमाग का विकास नहीं हो पाता और हृदय की गति पर à¤à¥€ विपरीत पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता हैं. आयोडीन की कमी से थायराइड गà¥à¤°à¤¨à¥à¤¥à¤¿ पर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता हैं और मानसिक विकृति की संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ à¤à¥€ बढ़ जाती हैं.
सेलेनियम की कमी से हृदय और परिसंचरण तनà¥à¤¤à¥à¤° पर विपरीत पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µ पड़ता है,इससे ओसà¥à¤Ÿà¤¿à¤¯à¥‹à¤…रà¥à¤¥à¤°à¤¾à¤‡à¤Ÿà¤¿à¤¸ होने की à¤à¥€ संà¤à¤¾à¤µà¤¨à¤¾ रहती हैं और पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ तनà¥à¤¤à¥à¤° à¤à¥€ कमजोर होता हैं.
विटामिन बी12 की कमी से लाल रकà¥à¤¤ कणिकाओं का निरà¥à¤®à¤¾à¤£ कम हो जाता हैं और तंतà¥à¤°à¤¿à¤•ाà¤à¤‚ à¤à¥€ विकृत होने लगती हैं. विटामिन A की कमी से दृषà¥à¤Ÿà¤¿ कमजोर होने लगती हैं,हडà¥à¤¡à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ का विकास à¤à¥€ नहीं हो पाता और रोग पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¥‹à¤§à¤• कà¥à¤·à¤®à¤¤à¤¾ à¤à¥€ कम होने लगती हैं.
यदि शरीर में विटामिन D की कमी हो जाà¤,तो रिकेटà¥à¤¸ और अनà¥à¤¯ हडà¥à¤¡à¥€ समà¥à¤¬à¤¨à¥à¤§à¤¿à¤¤ समसà¥à¤¯à¤¾ à¤à¥€ हो सकती हैं. फोलेट या विटामिन बी 9 कम होने पर à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ हो सकता हैं और विकास दर à¤à¥€ कम हो जाती हैं.जिंक की कमी होने पर à¤à¤¨à¥€à¤®à¤¿à¤¯à¤¾ के साथ संवेदी बोध à¤à¥€ कम हो जाता है
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